जब तुम्हे अपनी हिकायात सुना भी न सकूँ
जब कलेजे से तुम्हे बढ़ के लगा भी न सकूँ
जबके इस रस्मे मुरव्वत को निभा भी न सकूँ
दिल में सोई हुई हसरत को जगा भी न सकूँ
तब मेरे पास तुम आओगी तो क्या आओगी !
जबके साँसों में कहीं प्यार की खुशबू न रहे
बरसी आँखों में कोई दर्द का आंसू न रहे
रात की ज़ुल्फ़ में जब याद का जुगनू न रहे
इश्क की शम्मा में बाकी कोई जादू न रहे
तब मेरे पास तुम आओगी तो क्या आओगी
जब मेरे पास मेरे दिल की ये दौलत न बचे
जब ज़माने से बगावत की भी जुर्रत न बचे
जज़्ब-ए-इश्क में वो अबकी सी शिद्दत न बचे
तुमसे फिर प्यार जताने की भी हिम्मत न बचे
तब मेरे पास तुम आओगी तो क्या आओगी !




2 comments:
shandaar kavita..but pandit ji ek baat pe maine dhyan diya jis par chahunga ki aap bhi gaur farmayein..akhir aapke posts pe comment aana kaise band ho gaye!!aapki lekhni k mureed shrotagana kahan gaye??
@mohit- sab aap hi ki maaya hai :P
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