Saturday 27 August 2011

आखिर बुड्ढा है कौन


‘पकाऊ’ थीं उसके लिए
दूसरी सारी बातें
किसानों की खुदकुशी
संसद का हंगामा
दलितों का उत्पीड़न
और बंगाल के चुनाव

ऐसा नहीं था कि कहीं कम था
इंजीनियरिंग की सबसे अच्छी कोचिंग के बाद
सबसे अच्छे कालेज पहुंचा था

सोचता भी था
गांगुली के साथ न्याय नहीं हुआ
इमरान हाशमी कितना ‘लकी’ है
ब्लैक बेरी से बेहतर है गैलेक्सी
खटकता था उसे
विद्या बालन साड़ी के अलावा कुछ क्यों नहीं पहनती

अपने ग्रुप का अकेला ‘लिटरेरी बंदा’
इस तरह कि भरे रहते थे
कुमार विश्वास से लैपटाप
और चेतन भगत से अल्मारी
३५ रूपए वाला एसएमएस पैक
उसे २०० दोस्तों से बांधता था
क्योंकि उनमें हर एक दोस्त ज़रूरी था

टेलीविज़न पर अन्ना की आंधी से उसे उलझन नहीं हुई
क्योंकि न्यूज चैनल पर रूकता ही कहां था वो
लेकिन जब उसके आस पास भी होने लगीं वही बातें
जिन्हे झेल पाना उसके बस का नहीं था
तब उसने जानना चाहा
कि आखिर बुड्ढा है कौन

आज बारहवें दिन
अन्ना कुछ कमज़ोर दिख रहे हैं
और वो कह रहा है
बीजेपी का रवैया ढुलमुल है
कल राहुल का भाषण गुमराहकुन था
कोई पूछे कहां गए बुनकरों के लिए ३००० करोड़
१ लाख ७६ हजार करोड़ हमारी मेहनत के थे
जनता हिसाब चाहती है

और फिर सुनाता है फैज़ अहमद फैज़ का मिसरा
सब तख्त गिराए जाएंगे, सब ताज उछाले जाएंगे !

1 comments:

विजय गुप्ता said...

"अमां यार" गजब का लिखा है आपने । पढ़ कर दिल खुश हो गया । वाकई तबियत से लिखा है आपने। मैंने सारी रचनाएं पढ़ी....लगा जैसे मैंने क्या खो दिया था । भावनाओं की भट्ठी में पकी "हकीकत की एसिड " से सामना हुआ।
अंदर घुटते.... खौलते जज्बातों को लगा जैसे किसी ने आवाज दी है। "अमां यार ”....ये अपने आप में पूरी व्याख्या है।